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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 14
वल्मीकोपचितायां निर्गुण्ड्यां दक्षिणेन कथितकरेंः । पुरुषद्वये सपादे स्वादु जलं भवति चाशोष्यम् ॥
वल्मीकयुक्त निर्गुण्डी (सिन्दुवार वृक्ष 'सिन्दुवारेन्द्रसुरसौ निर्गुण्डीन्द्राणिकेत्यपी'- त्यमरः ) हो तो उससे तीन हाथ दक्षिण दिशा में सवा दो पुरुष नीचे कभी नहीं सूखने वाला जल होता है। यहाँ पर खोदने के समय वक्ष्यमाण चिह्न मिलते हैं-
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