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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 123
कलुषं कटुकं लवणं विरसं सलिलं यदि वा शुभगन्धि भवेत् । तदनेन भवत्यमलं सुरसं सुसुगन्धि गुणैरपरैश्च युतम् ॥
जो जल गन्दला, कहुआ, खारा, बेस्वाद या दुर्गन्ध वाला हो, वह इन पूर्वोक्त औषधियों के डालने पर निर्मल, मधुर, सुन्दर गन्ध वाला और अनेक गुणों से युक्त हो जाता है।
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