पूर्वापरायत वापी में अधिक समय तक जल ठहरता है। दक्षिणोत्तरायत वापी में जल नहीं ठहरता है; क्योंकि वायु के तरङ्गों से वह वापी नष्ट हो जाती है। यदि दक्षिणो- त्तरायत वापी बनाना चाहे तो तरङ्गों से बचाने के लिये उसके किनारों को मजबूत लकड़ी या पत्थर आदि से चुनवा दे तथा बनाने के समय मिट्टी की हरेक तह को हाथी-घोड़े आदि को उस पर दौड़ाकर बैठाता जाय, जिससे कि मिट्टी दबकर विशेष मजबूत हो जाय।
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