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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 116
नैम्बं पत्रं त्वक्च नालं तिलानां साप्रामार्ग तिन्दुकं स्याद् गुडूची । गोमूत्रेण स्रावितः क्षार एषां षट्कृत्वोऽ तस्तापितो भिद्यतेऽश्मा ॥
नीम के पत्ते, नीम की छाल, तिलों का नाल, अपामार्ग, तेन्दू का फल, गिलोय- इन सबों के भस्म को गोमूत्र में मिलाकर उसे तपाई हुई शिला पर छः बार छिड़कने से शिला फूट जाती है।
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