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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 113
तोयं श्रितं मोक्षक भस्मना वा यत्सप्तकृत्वः परिषेचनं तत् । कार्यं शरक्षारयुतं शिलायाः प्रस्फोटनं वह्निवितापितायाः ॥
मोक्षक (काली पाढरि) वृक्ष की लकड़ी का भस्म मिलाकर जल को गर्म करे और फिर उसमें शर के वृक्ष का भस्म मिलावे; बाद में अग्नि से तपाई हुई शिला पर उसे सात बार छिड़कने से शिला फूट जाती है।
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