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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 112
भेदं यदा नैति शिला तदानीं पलाशकाष्ठैः सह तिन्दुकानाम् । प्रज्वालयित्वानलमग्निवर्णा सुधाम्बुसिक्ता प्रविदारमेति ॥
यदि कूप आदि खोदने के समय पत्थर निकल जाय और वह आसानी से न फूट सके तो उसके ऊपर ढाक और तेन्दु की लकड़ी जला कर आग के समान लाल बना कर उसके ऊपर चूने की कली से मिश्रित जल का छिड़काव करने से वह शिला फूट जाती है।
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