वैदूर्यमुद्गाम्बुदमेचकाभा पाकोन्मुखोदुम्बरसन्निभा वा । भङ्गाञ्जनाभा कपिलाथवा या ज्ञेया शिला भूरिसमीपतोया ॥
वैदूर्य मणि, मूंग या मेघ के समान काला, पकने वाले गूलर के फल के समान, फोड़ने से अञ्जन के समान काला या पछि पत्थर जहाँ हो, वहाँ पर समीप में ही बहुत जल होता है।
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