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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 105
शाकाश्वकर्णार्जुनविल्वसर्जाः श्रीपर्ण्यरिष्टाधवशिंशपाश्च । छिद्रैश्च पत्रैर्दुमगुल्मवल्ल्यो रूक्षाश्च दूरेऽम्बु निवेदयन्ति ॥
जहाँ पर छिद्र वाले पत्तों से युत शाक (तरकारी सब्जी), अश्वकर्ण (संखुआ), अर्जुन, बेल, सर्ज, श्रौपर्णी, अरिष्ट, धव, शीशम-ये वृक्ष हों तथा जहाँ पर छिद्र वाले एनों में यत व गल्म लता हो: वहाँ बहत दर पर जल होता है।
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