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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 104
सशर्करा ताम्रमही कषायं क्षारं धरित्री कपिला करोति । आपाण्डुरायां लवणं प्रदिष्टं मृष्टं पयो नीलवसुन्धरायाम् ॥
पत्थर के कणों से मिली हुई ताम्र वर्ण की भूमि में कसैला, पीली भूमि में खारा, पाण्डु रङ्ग की भूमि में नमकीन और नीली भूमि में मीठा जल होता है।
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