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बृहत्संहिता • अध्याय 54 • श्लोक 100
स्निग्धा यतः पादपगुल्मवल्ल्यो निश्छिद्रपत्राश्च ततः शिरास्ति । पद्मक्षुरोशीरकुलाः सगुण्ड्राः काशाः कुशा वा नलिका नलो वा ॥
जहाँ पर स्निग्ध, छिद्ररहित पत्तों से युत वृक्ष, गुल्म या लता हो; वहाँ तीन पुरुषप्रमाण नीचे जल होता है। अथवा स्थलकमल, गोखरू, उशीर (खस), कुल- ये द्रव्यविशेषः गुण्ड्र (सरकण्डा, शर), काश, कुशा, नलिका, नल-ये तृणविशेष
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