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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 99
अङ्गुष्ठकेन कुर्यान्मध्याङ्गुल्याऽथवा प्रदेशिन्या । कनकमणिरजतमुक्तादधिफलकुसुमाक्षतैश्च शुभम् ॥
यदि अँगूठा, मध्यमा, प्रदेशिनी, सोना, चाँदी, मोती, दही, फल, फूल या अक्षत से गृहारम्भ की रेखा बनायी जाय तो गृहपति के लिये वह रेखा शुभ होती है।
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