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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 98
विप्रः स्पृष्ट्वा शीर्षं वक्षश्च क्षत्रियो विशश्चोरू । शूद्रः पादौ स्पृष्ट्वा कुर्याद्रखां गृहारम्भे ॥
स्थपति ( कारीगर ) और ब्राह्मणों की पूजा करके यदि गृहपति ब्राह्मण हो तो शिर, क्षत्रिय हो तो छाती, वैश्य हो तो ऊरू और शूद्र हो तो पाद-स्पर्श करके गृहारम्भ की रेखा खींचे।
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