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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 97
भक्ष्यैर्नानाकारैर्दध्यक्षतसुरभिकुसुमधूपैश्च दैवतपूजां कृत्वा स्थपतीनभ्यर्च्य विप्रांश्च ॥
पुनः दैवज्ञ के द्वारा बताये गये मुहूर्त में वहाँ जाकर अनेक प्रकार के भक्ष्य पदार्थ, दधि, अक्षत, सुगन्ध, पुष्प और धूपों से क्षेत्रपति
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