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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 96
कृष्टां प्ररूढबीजां गोऽध्युषितां ब्राह्मणैः प्रशस्तां च । गत्वा महीं गृहपतिः काले सांवत्सरोद्दिष्टे ॥
गृहपति ब्राह्मणों के द्वारा प्रशंसित भूमि को पहले हल से जोतवा कर उसमें बीज वपन करे, तत्पश्चात् उस बीज के पक जाने पर एक रात के लिये उसमें गायों को बैठावे
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