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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 95
कुशयुक्ता शरबहुला दूर्वाकाशावृता क्रमेण मही । ह्यनुवर्णं वृद्धिकरी मधुरकषायाम्लकटुका च ॥
ब्राह्मण आदि वर्णों के लिये क्रम से कुशों से युत, मुञ्जों से युत, दूबों से युत एवं कासों से युत भूमि शुभ होती है तथा ब्राह्मणादि के लिये क्रम से मीठी, कषैली, खट्टी और कड़‌वी मिट्टी वाली भूमि भी शुभ होती है।
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