श्वश्नोषितं न कुसुमं यस्य ब्रम्लायतेऽनुवर्णसमम् । तत्तस्य भवति शुभदं यस्य च यस्मिन् मनो रमते ॥
सायङ्कल ब्राह्मण आदि वर्णतुल्य वर्ण बाले पुष्पों (सफेद, लाल, पीले और काले पुष्पों) को लेकर गड्ढे में डाल दे और दूसरे दिन प्रात:काल उन पुष्पों को निकाल कर देखने पर जिस वर्ण का पुष्प कुम्हलाया न हो, उसके लिये वह भूमि शुभ होती है।
अथवा अपना मन जहाँ पर प्रसन्न रहे वहीं पर निवासस्थान बनाना चाहिये, इसमें अधिक विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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