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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 91
श्वभ्रमथवाऽम्बुपूर्ण पदशतमित्वा गतस्य यदि नोनम् । तद्धन्यं यच्च भवेत् पलान्यपामाढकं चतुःषष्टिः ॥
पूर्वकथित प्रकार से गड्ढे को खोदने के पश्चात् उसमें जल भर कर वहाँ से सौ पद तक दूर जाकर पुनः वापस आने पर यदि गड्ढे का जल ज्यों का त्यों बना रहे तो शुभ होता है। इसी प्रकार वहाँ की धूली से एक आढ़क प्रमाण वाली टोकरी को भर कर पुनः उस धूली को तौलने पर यदि वह धूली चौंसठ पल के बराबर हो तो वह भूमि शुभ होती है।
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