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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 90
गृहमध्ये हस्तमितं खात्वा परिपूरितं पुनः श्वभ्रम् । यद्यूनमनिष्टं तत् समे समं धन्यमधिकं यत् ॥
गृहकर्ता के हाथ से गृहमध्य में एक हाथ लम्बा, एक हाथ चौड़ा और एक हाथ गहरा गड्डा खोदकर पुनः उस गड्ढे को उसी मिट्टी से भरे, यदि गड्ढे को भरने में गड्ढे से हो निकाली गई मिट्टी कम पड़ जाय तो अशुभ, पूरी तरह से गड्डा भर जाय तो सम और गड्डा भरकर मिट्टी ज्यादा हो जाय तो शुभ होता है।
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