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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 9
अध्यक्षाधिकृतानां सर्वेषां कोशरतितुल्यम् । युवराजमंन्त्रिविवरं कर्मान्ताध्यक्षदूतानाम् ॥
अधशाला, गजशाला और गोशाला के अधिकारियों तथा और कार्यों के जो स्वामी होते हैं, उन सबके लिये कोश या तिगृह के बराबर गृह बनाना चाहिये। साथ ही कर्म- शाला के जी स्वामी होते हैं, उनका और दूतों का गृह युवराज और मन्त्री के गृह के दैवं-विस्तार कर जो अन्तर हो, उसके बराबर दैप्यं-विस्तार लेकर बनाना चाहिये।
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