अधशाला, गजशाला और गोशाला के अधिकारियों तथा और कार्यों के जो स्वामी
होते हैं, उन सबके लिये कोश या तिगृह के बराबर गृह बनाना चाहिये। साथ ही कर्म-
शाला के जी स्वामी होते हैं, उनका और दूतों का गृह युवराज और मन्त्री के गृह के
दैवं-विस्तार कर जो अन्तर हो, उसके बराबर दैप्यं-विस्तार लेकर बनाना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।