छिन्द्याद्यदि न तरूंस्तान् तदन्तरे पूजितान् वपेदन्यान् । पुन्नागाशोकारिष्टबकुलपनसान् शमीशाली ॥
साथ ही इनके काष्ठों का गृह में प्रयोग करने से भी शुभ नहीं होता है। यदि उपर्युक्त काँटेदार आदि वृक्षों को काट कर उनकी जगह पुत्राग, अशोक, अरिष्ट, वकुल, कटहल, शमी या शाल वृक्ष का रोपण किया जाय तो उपर्युक्त दोषों की प्राप्ति नहीं होती।
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