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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 82
पुरभवनग्रामाणां ये कोणास्तेषु निवसतां दोषाः । श्वपचादयोऽन्त्यजात्यास्तेष्वेव विवृद्धिमायान्ति ॥
पुर, भवन और ग्रामों के जो कोने हों, उनमें निवास करने वाले को दोष होता है; किन्तु श्वपच (चाण्डाल, डोम आदि), अन्त्यज (चमार आदि) नीच जातियों के वहाँ (कोने में) निवास करने से गृहस्वामी की उन्नति होती है।
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