यदि ऊपरी काष्ठ आदि के भार से दबा हुआ द्वार हो तो गृहस्वामी को पीड़ा देता है, भीतर की ओर शुका हुआ द्वार हो तो गृहस्वामी की मृत्यु कराता है, बाहर को झुका हुआ द्वार गृहस्वामी को प्रवासी बनाता है और दिग्भ्रान्त (जिस दिशा का द्वार हो, उससे भित्र दिशा को देखता) हो तो गृहस्वामी को चोरों से पीड़ित कराता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।