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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 78
द्वारं द्वारस्योपरि यत्तन्न शिवाय सङ्कटं यच्च । आव्यात्तं क्षुद्धयदं कुब्जं कुलनाशनं भवति ॥
परिमाण हो तो राजभय और प्रमाण से अल्प परिमाण वाला द्वार हो तो चोरभय एवं दुःख होता है। यदि एक घर के द्वार पर दूसरे खण्ड का द्वार पड़े तो शुभ नहीं होता। जिस द्वार की मोटाई अल्प हो, वह भी शुभ नहीं होता है। दिङ्ग की आकृति वाला अति विपुल द्वार क्षुधा का भय करता है और कुबड़ा द्वार कुल का नाश करता है।
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