उन्मादः स्वयमुद्घाटितेऽथ पिहिते स्वयं कुलविनाशः । मानाधिके नृपभयं दस्युभयं व्यसनमेव नीचे च ॥
जिस गृह के द्वार का किवाड़ विना खोले ही खुल जाय, उसमें रहने वाले उन्माद, अपने-आप बन्द हो जाय तो कुल का नारा, पूर्वकथित परिमाण से अधिक
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