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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 76
कूपेनापस्मारो भवति विनाशश्च देवताविद्धे । स्तम्भेन स्त्रीदोषाः कुलनाशो ब्राह्मणाभिमुखे ॥
कूप से वेधित हो तो मृगी रोग की उत्पत्ति, देवता की प्रतिमा से वेधित हो तो गृहस्वामी का नाश, स्तम्भ से वेधित हो तो खियों में दोष और ब्रह्मा के सम्मुख हो तो सम्पूर्ण कुल का ही नाश करता है।
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