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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 75
रथ्याविद्धं द्वारं नाशाय कुमारदोषदं तरुणा। पङ्कद्वारे शोको व्ययोऽम्बुनिः स्त्राविणि प्रोक्तः ॥
यदि गृहद्वार मार्ग से वेधित हो तो गृहस्वामी की मृत्यु, वृक्ष से वेधित हो तो बालकों में दोष, पङ्क ( कीचड़) से वेधित हो तो शोक, मोरी से वेधित हो तो व्यर्थ खर्च
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