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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 73
वधबन्यो रिपुवृद्धिः सुतधनलाभः समस्तगुणसम्पत् । पुत्रधनाप्तिवरं सुतेन दोषाः स्त्रिया नैः स्वम् ॥
रोग से लेकर दिति तक आठ देवता उत्तर भाग में अवस्थित होते हैं। उनमें से रोग के ऊपर द्वार हो तो मृत्यु और बन्धन, सर्प के ऊपर द्वार हो तो शत्रु की वृद्धि, मुख्य के ऊपर द्वार हो तो पुत्र और धन का लाभ, भल्लाट के ऊपर द्वार हो तो सम्पूर्ण शौर्यादि गुणों की सम्पत्ति, सोम के ऊपर द्वार हो तो पुत्र से द्वेष, अदिति के ऊपर द्वार हो तो स्त्री के द्वारा दोष तथा दिति के ऊपर द्वार हो तो निर्धनता होती है।
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