सुतपीडा रिपुवृद्धिर्न सुतधनाप्तिः सुतार्थफलसम्पत् । धनसम्पन्नृपतिभयं धनक्षयो रोग इत्यपरे ॥
पिता से लेकर पापयक्ष्मा तक आठ देवता पश्चिम भाग में अवस्थित रहते हैं। उनमें से पिता के ऊपर द्वार हो तो पुत्रों की पीड़ा, दौवारिक के ऊपर द्वार हो तो शत्रु की वृद्धि, सुग्रीव के ऊपर द्वार हो तो पुत्र और धन का लाभ, कुसुमदन्त के ऊपर द्वार हो तो पुत्र और धन-सम्पत्ति की प्राप्ति, वारुण के ऊपर द्वार हो तो धन-सम्पत्ति का लाभ, असुर के ऊपर द्वार हो तो राजभय, शोष के ऊपर द्वार हो तो धननाश तथा पापयक्ष्मा के ऊपर द्वार हो तो रोग की प्राप्ति होती है।
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