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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 70
अनिलभयं स्त्रीजननं प्रभूतघनता नरेन्द्रवाल्लभ्यम् । क्रोधपरतानृतत्वं क्रौर्य चौर्य च पूर्वेण ॥
शिखी से लेकर अन्तरिक्ष तक आठ देवता पूर्व भाग में अवस्थित होते हैं, उनमें से शिखी के ऊपर द्वार हो तो गृहस्वामी को अग्निभय, पर्जन्य के ऊपर द्वार हो तो कन्याजन्म, जयन्त के ऊपर द्वार हो तो अत्यधिक धन की प्राप्ति, इन्द्र के ऊपर द्वार हो तो राजा को प्रसन्नता, सूर्य के ऊपर द्वार हो तो क्रोध का आधिक्य, सत्य के ऊपर द्वार हो तो असत्य भाषण, भृश के ऊपर द्वार हो तो क्रूरता और अन्तरिक्ष के ऊपर द्वार हो तो तस्करता आती है।
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