मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 7
षभिः ष‌भिश्चैवं युवराजस्यापवर्जिताऽ शीतिः । त्र्यंशान्विता च दैर्ध्य पञ्च तदर्थैस्तदनुजानाम् ॥
इसी प्रकार युवराज के लिये पाँच घर बनाना चाहिये। जिसमें प्रथम गृह का विस्तार ८० हाथ और बाकी चार मकानों में ६-६ हाथ कम करके विस्तार की कल्पना करनी चाहिये। जैसे दूसरे घर का विस्तार ७४, तीसरे का ६८, चौथे का ६२ और पाँचवें का ५६ हाथ होना चाहिये। विस्तार में विस्तार का तीसरा भाग जोड़ कर दैर्ध्य क्रम से १०६।१६, ९८/१६, ९०/१६, ८२।१६ और ७४।१६, कल्पना करनी चाहिये। इसी तरह युवराज के गृह का आधा विस्तार और दैर्ध्य युवराज के छोटे भाई और भृत्यों का होना चाहिये। यथा युवराजानुज का विस्तार ४०, ३७, ३४, ३१, २८ दैर्ध्य ५३१८, ४९१८, ४५१८, ४११८, ३७।८ होनी चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें