वासगृहाणि च विन्द्याद्विप्रादीनामुदग्दिगाद्यानि । विशतां च यथा भवनं भवन्ति तान्येव दक्षिणतः ॥
ब्राह्मण आदि वर्ण को क्रम से उत्तर आदि दिशा में वासगृह बनाना चाहिये। जैसे ब्राह्मण को उत्तर में, क्षत्रिय को पूर्व में, वैश्य को दक्षिण में और शुद्र को पश्चिम में अपना निवासस्थान बनाना चाहिये। गृह इस प्रकार बनाना चाहिये, जिससे कि आङ्गन में प्रवेश करते समय वे गृह दक्षिण की और पढ़ें। जैसे पूर्वमुख वाले गृह के आङ्गन का द्वार उत्तर
में, दक्षिणमुख वाले गृह के आङ्गन का द्वार पूर्व में, पश्चिममुख वाले गृह के आङ्गन का
द्वार दक्षिण में और उत्तरमुख वाले गृह के आङ्गन का द्वार पश्चिम में बनाना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।