गृहनगरप्रामेषु च सर्वत्रैवं प्रतिष्ठिता देवाः । तेषु च यथानुरूपं वर्णा विप्रादयो वास्याः ॥
इसी प्रकार से गृह, नगर और ग्रामों में सभी देवगण विराजमान रहते हैं। उन नगर और ग्रामों में ब्राह्मण आदि वर्णों को भी यथाक्रम निवास करना चाहिये।
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