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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 66
स्त्रीदोषाः सुतमरणं प्रेष्यत्वं चापि चरणवैकल्ये । अविकलपुरुषे वसतां मानार्थयुतानि सौख्यानि ॥
सब गुणों का नाश तथा चरण हीन हो तो स्त्रीदोष, पुत्र की मृत्यु और दासत्व की प्राप्ति होती है। यदि वास्तु पुरुष के सभी अङ्ग पूर्ण हों तो उस स्थान में निवास करने वाले मनुष्य को मान और धन से समन्वित सुख की प्राप्ति होती है।
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