मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 63
पदहस्तसंख्यया सम्मितानि वंशोऽङ्गुलानि विस्तीर्णः । वंशव्यासोऽध्यर्घः शिराप्रमाणं विनिर्दिष्टम् ॥
पूर्वकथित ६ सूत्रों की 'वंश' संज्ञा है तथा वास्तु विभाग के लिये जो पूर्वापरा एवं दक्षिणोत्तरा दश-दश रेखायें की गई हैं, उनकी 'शिरा' संज्ञा होती है। वास्तु में एक पाद का विस्तार जितने हाथ का हो, उतने ही अङ्गुल एक वंश का विस्तार और विस्तार से ड्योढ़ा शिरा का विस्तार होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें