पूर्वकथित ६ सूत्रों की 'वंश' संज्ञा है तथा वास्तु विभाग के लिये जो पूर्वापरा एवं दक्षिणोत्तरा दश-दश रेखायें की गई हैं, उनकी 'शिरा' संज्ञा होती है। वास्तु में एक पाद का विस्तार जितने हाथ का हो, उतने ही अङ्गुल एक वंश का विस्तार और विस्तार से ड्योढ़ा शिरा का विस्तार होता है।
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