सूत्र बाँधने पर इन सूत्रों के परस्पर नव सम्पात स्थान वास्तुपुरुष के अतिमर्म स्थान होते हैं। साथ ही एक पद में अष्टमांशतुल्य मर्मस्थान का परिमाण होता है।
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