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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 62
तत्सम्पाता नव ये तान्यतिमर्माणि सम्प्रदिष्टानि । यश्च पदस्याष्टांशस्तत् प्रोक्तं मर्मपरिमाणम् ॥
सूत्र बाँधने पर इन सूत्रों के परस्पर नव सम्पात स्थान वास्तुपुरुष के अतिमर्म स्थान होते हैं। साथ ही एक पद में अष्टमांशतुल्य मर्मस्थान का परिमाण होता है।
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