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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 56
अष्टौ च बहिष्कोणेष्वर्यपदास्तदुभयस्थिताः सार्धाः । उक्तेभ्यो ये शेषास्ते द्विपदा विंशतिस्ते हि ॥
इनके दोनों तरफ पर्जन्य, भृश, पूषा, भृङ्गराज, दौवारिक, शोष, नाग और अदिति सार्थपदीय ( डेढ़ पद के स्वामी है तथा शेष बीस देवता ( जयन्त, इन्द्र, सूर्य, सत्य, वितथ, बृहत्संत, यम, गन्धर्व, सुग्रीव, कुसुमदन्त, वरुण, असुर, मुख्य, भल्लाट, सोम, भुजग, अर्यमा, विवस्वान्, मित्र और पृथ्वीधर-ये बीस देवता ) द्विपदीय हैं।
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