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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 55
अष्टाष्टकपदमथवा कृत्वा रेखाश्च कोणगास्तिर्यक् । ब्रह्मा चतुष्पदोऽस्मिन्नर्थपदा ब्रह्मकोणस्थाः ॥
रेखा खींचकर चौंसठ पद का क्षेत्र बनाना चाहिये)। फिर इसके चारो कोनों में कर्णाकार दो-दो रेखायें खींचने से यह क्षेत्र बन जाता है। इस क्षेत्र में चार पर्दो का स्वामी ब्रह्मा और ब्रह्मा के चारों कोनों में आठ देवता ( आप, आपवत्स, सथिता, सवित्र, इन्द्र, जयन्त, राजयक्ष्मा और रुद्र) और बाहर के चारों कोनों में आठ देवता ( शिखी, अन्तरिक्ष, अनिल अथवा अनल, मृग, पिता, पापयक्ष्मा, रोग और दिति ) अर्धपदीय हैं
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