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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 54
वामपार्श्वस्थाः । मेढ़े शक्रजयन्तो हृदये ब्रह्मा पिताऽ‌ङ्घ्रिगतः ॥
बंधा में सुपीक तथा कुल्ले में दौवारिक स्थित है। इसी तरह लिङ्ग में शक्र और जयन्त, हृदय में बड़ा और पौष में पिता स्थित है। इस तरह इक्यासी पद में नगर, ग्राम, गृह आदि के आब में वास्तु पुरुष के अंगों का विभाग करना चाहिये।
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