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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 52
पर्जन्याऽद्या बाह्या दृक्श्रवणोरः स्थलांसगा देवाः । सत्याद्याः पश्च भुजे हस्ते सविता च सावित्रः ॥
जैसे-नेत्र में 30 पर्जन्य, कान में जयन्त, छाती में इन्द्र और कन्धे में सूर्य स्थित हैं। तथा भुजा में सत्य आदि पाँच देवता (सत्य, पृत, अन्तरिक्ष, अनिल और पूषा), हाथ में वितथ और बृहत्श्चत, पेट में विवस्वान्, ऊरु में यम, जानु में गन्धर्व, जंपा में भृङ्गराज और कुल्ले में मृग स्थित है।
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