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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 50
बाह्या द्विपदाः शेषास्ते विबुधा विंशतिः समाख्याताः । त्रिपदा दिश्वर्यमाद्यास्ते ॥
शेष बाह्य कोष्ठ में स्थित देवता द्विपदिक हैं, जो कुल बीस होते हैं। जैसे-पूर्व में जयन्त, इन्द्र, सूर्य, सत्य, भृश। दक्षिण में वितथ, बृहत्क्षत, यम, गन्धर्व, पूङ्गराज। पश्चिम में सुग्रीव, कुसुमदन्त, वरुण, असुर, शोष और उत्तर में मुख्य, भल्लाट, सोम, भुजग और अदिति- ये द्विप- दिक देवता हैं। ब्रह्मा से पूर्व आदि दिशाओं में शेष अर्थमा आदि चार देवता ( अर्यमा, विवस्वान्, मित्र और पृथ्वीधर) त्रिपदिक हैं।
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