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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 5
षभिः षड्भिींना सेनापतिसद्मनां चतुःषष्टिः । एवं पञ्च गृहाणि षड्भागसमन्विता दैर्ध्वम् ॥
सेनापति के प्रथम गृह का विस्तार ६४ हाथ का बनाना चाहिये। शेष चार मकानों में छः-छः हाथ कम करके विस्तार रखना चाहिये और विस्तार से षष्ठांश अधिक दैर्ध्य बनाना चाहिये। जैसे कि प्रथम गृह का विस्तार ६४ एवं दैर्ध्य ७४ हाथ १६ अंगुल, द्वितीय गृह का विस्तार ५८ हाथ एवं दैर्ध्य ६७ हाथ १६ अंगुल, तृज्य गृह का विस्तार ५२ हाथ एवं दैर्ध्य ६० हाय १६ अंगुल, चौथे गृह का विस्तार ४६ हाथ एवं दैर्ध्य ५३ हाथ १६ अंगुल तथा पाँचवें गृह का विस्तार ४० हाथ एवं दैर्ध्य ४६ हाथ १६ अंगुल होना चाहिये।
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