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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 49
आपस्तथापवत्सः पर्जन्योऽग्निर्दितिश्च वर्गोऽयम् । एवं कोणे कोणे पदिकाः स्युः पश्च पञ्च सुराः ॥
इस क्षेत्र के ईशान कोण में आप, आपवत्स, पर्जन्य, अग्नि, दिति-ये पाँच देवता एकपदिक (एक-एक पद के स्वामी) हैं। इसी तरह प्रत्येक कोण में पाँच-पाँच देवता एकपदिक हैं। जैसे-आग्नेय कोण में सविता, सवित्र, अनल या अनिल, अन्तरिक्ष, पूषा। नैऋत्य कोण में इन्द्र, जय, दौवारिक, पिता, मृग और वायव्य कोण में राजयक्ष्मा, रुद्र, पापयक्ष्या, रोग, नाग-ये पाँच देवता एकपदिक हैं।
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