आपो नामैशाने कोणे हौताशने च सावित्रः । जय इति च नैऋते रुद्र आनिलेऽभ्यन्तरपदेषु ॥
आग्नेय
कोण में अन्तरिक्ष के नीचे सावित्र, नैर्श्वत्य कोण में दौवारिक के नीचे जय और वायव्य
कोण में पापयक्ष्मा के नीचे रुद्र स्थित हैं।
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