मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 47
विबुधाधिपतिस्तस्मान्मिन्त्रोऽन्यो राजयक्ष्मनामा च । पृथिवीधरापवत्सावित्येते ब्रह्मणः परिधौ ॥
विवस्वान, इन्द्र, मित्र, राजयक्ष्मा, पृरीधर, आपवत्स-ये आठ देवता एकान्तर से ब्रह्माजी की परिधि को व्याप्त करके विराजमान है। साथ ही ईशान कोण में पर्जन्य के नीचे आप
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें