विबुधाधिपतिस्तस्मान्मिन्त्रोऽन्यो राजयक्ष्मनामा च । पृथिवीधरापवत्सावित्येते ब्रह्मणः परिधौ ॥
विवस्वान, इन्द्र, मित्र, राजयक्ष्मा, पृरीधर, आपवत्स-ये आठ देवता एकान्तर से ब्रह्माजी की परिधि
को व्याप्त करके विराजमान है। साथ ही ईशान कोण में पर्जन्य के नीचे आप
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