एकाशीतिविभागे दश दश पूर्वोत्तरायता रेखाः । अन्तस्त्रयोदश सुरा द्वात्रिंशद्वाह्यकोष्ठस्थाः ॥
इक्यासी पद के क्षेत्र बनाने के लिये दश रेखा पूर्वपरा और दश रेखा दक्षिणोत्तरा बनानी चाहिये, इस तरह रेखायें करने से ८१ कोष्ठ का क्षेत्र बन जायगा। उस कोष्ठ के बाहर तेरह और भीतर बत्तीस देवता होते हैं।
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