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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 41
दण्डवघो दण्डाख्ये कलहोद्वेगः सदैव वाताख्ये । वित्तविनाशश्शुल्ल्यां ज्ञातिविरोधः स्मृतः काचे ॥
सिद्धार्थ वास्तु में धन की प्राप्ति, यमसूर्य में गृहस्वामी को मृत्यु, दण्ड में दण्ड से मृत्यु (या दण्ड और वथ), वात में सदा कलह, गृहचुल्ली में धन का नाश और काचसंज्ञक वास्तु में बन्धुओं से विरोध होता है।
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