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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 40
पूर्वापरे तु शाले गृहचुल्ली दक्षिणोत्तरे काचम् । सिद्धार्थेऽ र्थावाप्तिर्यमसूर्ये गृहपतेमृत्युः ॥
जिसके पूर्व और दक्षिण में शाला हो उसको 'वात', जिसके पूर्व और पश्चिम में शाला हो उसको गृह इली' और जिसके दक्षिण और उत्तर में शाला हो उसको 'काच संज्ञक वास्तु कहते हैं।
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