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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 38
याम्याहीनं चुल्ली त्रिशालकं वित्तनाशकरमेतत् । पक्षघ्नमपरया वर्जितं सुतध्वंसवैरकरम् ॥
जिसके दक्षिण तरफ भौत न हो और शेष तीन दिशाओं में हो उसको 'चुल्ली' नामक त्रिशाल वास्तु कहते हैं, यह वास्तु धन का नाश करती है। जिसके पश्चिम तरफ भौत न हो और शेष तीन दिशाओं में हो उसको 'पक्षप्न' नामक त्रिशाल वास्तु कहते हैं, यह वास्तु पुत्र का नाश और वैर कराने वाली होती है।
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