द्वारालिन्द (प्रधान भवन के द्वार का अलिन्द) के अन्तगत (दक्षिणोत्तर भित्ति संलग्न ) हो और द्वितीय अलिन्द उससे प्रदक्षिणक्रम से गया हो तथा तृतीय अलिन्द उससे प्रदक्षिणक्रम से स्थित हो तो उसको 'वर्षमान' वास्तु कहते हैं। इसके दक्षिण में द्वार नहीं रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।