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बृहत्संहिता • अध्याय 53 • श्लोक 29
स्तम्भं विभज्य नवधा वहनं भागो घटोऽस्य भागोऽन्यः । पद्म तथोत्तरोष्ठं कुर्याद् भागेन भागेन ॥
स्तम्भ का नव भाग करके उसमें नीचे के प्रथम भाग का नाम 'बहन' (उस भाग द्वारा भूमि को धारण करने के कारण), द्वितीय भाग का 'पट' ( घड़े को आकृति वाला होने के कारण ), तृतीय भाग का 'पद्म' (पद्याकृति वाला होने के कारण) और चतुर्थ भाग का नाम 'उत्तरोत' (जहाँ पर शोभा के लिये विशेष रूप बनाते हैं) कहा गया है।
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